Sunday, July 31, 2011

बिटिया

बहुत दिनों बाद
भीगी थी ये आँखे
तेरे आने की खुशी में
तुझे देख कर
तू मेरी नन्ही परी

मेरा दिल गाता  था
जब तू किलकती
मुस्कुराती
मेरी आँखे भर जाती थी
जब अपने नन्हे हान्थो से
मेरी मूँछे नाक छूती
गाल सहलाती

जब घुटनो के बल
चलती,
मेरे पास आती
मेरी गोद में खेलती
सोती समाती
मुझे बातें करती
तुतलाती

तू लता सी
बढ़ती
फ्राक से
सलवार कमीज़ तक
पल में पहुचती

बदलते रिश्ते
तू बनती माँ मेरी

ना जाने कैसे
मेरे ज़ज्बात समझ जाती
ना जाने कैसे
मेरी  हर बात समझ जाती

मेरे हर पल का
हिसाब रखती
शायद अपनी एक आँख
मेरे पास रखती
हर गम दर्द मिट जाता
जब मेरे माथे पर हाथ धरती

मुझे थपकीयाँ देती
सांत्वना देती
राह सुझाती
जीना सिखाती
गाड़ी धीरे चलाने को कहती
वक़्त पर घर आने को कहती

माँ  तेरे जाने के बाद
सब कहते थे
इस जनम में
वापस लौट के ना आएगी तू
पर देख आख़िर तुझे मैने
पा लिया इसी जिंदगी मे दुबारा
मेरी बिटिया
मेरी माँ


Wednesday, July 27, 2011

वो दिन भी कितने अच्छे थे

वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
छोटी सी निकर में
हम सब गलियों घुमा करते थे...

हम अपने दोस्तो से
जब कत्ति मीठी करते थे,
उनसे दुश्मन जैसे लड़ते थे.
.जिन के बिन हम 2 पल भी
नही रह सकते थे....

जब उँचे उँचे झाड़ो पर
हम झट से चढ़ जाया करते थे..
डर लगने पर..
मौत से क्या डरना
गाया करते थे...

जब हाथ में गन लेकर
हम हेलो अल्फ़ा बीटा करते थे..
और ना दिखने वाले दुश्मन को
तिस्कियाओं तिस्कियाओं कर
मारा करते थे....

वो चित्रहार के दिन थे..
वो मोगली सबको प्यारा था..
वो कंचे तारे जैसे थे
गोविंदा सारे जान्हा से न्यारा था...

जब नानी के यान्हा का
का हलवा बहुत ही खास था..
जब फलो का राजा जाम था..
और पीपल मे चुड़ाइलो का वास था

जब पापा के बाजार से आते ही
हमारे चेहरे खिल जाया करते थे
वो मुच्हर अंकल टॉफ़ी देते थे
जिनसे हम सबे जीयादा डरते थे.

वो स्कूलओ के दिन थे
वो भूतो के कहानी वाली राते थी.
दोस्तों की शामे थी..
और 100 झूठ वाली बाते थी..

वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
जब बड़े भिया के साथ
हम मैच खेलने जाया करते थे..
20-20 के उस मैच  वे बस
हमसे फीलडिंग करवाया करते थे..

Continue...............