Thursday, August 18, 2011

जिंदा हूँ मैं


 मेरे जेब मे थे
बस १० रुपय
और तूने चुकाया था
१०० रुपय का वो उधार
जो तूने कभी लिया ही नही
मेरे जेब मे थे
बस १० रुपय
और तूने ज़िद करके
पानी पूरी खाया था
और दोनों
ही बार मैने तुझे
बड़ी वाली गाली दी थी

कई बार पिए हम
साथ में
तेरी कॉलेज वाली
के बर्थ डे पर
तेरी पहली वाली की शादी पर
तेरे कॅंपस प्लेसमेंट पर
साला रात भर पीते
दिन भर औंकते
उनसे बढ़ कर आज भी
कोई पल नही
आज भी कोई पार्टी नही
सच मे भाई......

जिंदगी के बहुत सारे
पल अमर कर दिए
विल्स गोल्डफ्लेक
के धुओं मे...
तेरे साथ...
गुमटीयों मे

मेरी उससे भी ज़्यादा
तू ही याद आता है मुझे

साला जब पी के बोलता है तू
आई लव यू ब्रो
जब टल्ली मे बोलता है
आई मिस यू ब्रो
लगता है की
जिंदा हूँ मैं

Saturday, August 13, 2011

चाहिए एक और जे. पी.

देश के विकास का
विधान हमको चाहिए
भ्रष्टाचार के लिए मौत
का प्रावधान
हमको चाहिए
देश का लूटा
हर एक समान
हमको चाहिए

काले धन की पाई पाई
का हिसाब हमको चाहिए
फाँसी पर लटकते
अफ़ज़ल कसाब हमको चाहिए
हाँ चाहिए कश्मीर एकछत्र
सिंध पंजाब पूरा चाहिए

देश मे राष्ट्रीयता की
एक आँधी
हमको चाहिए
हाँ चाहिए एक और जे. पी.
मोहन वाला गाँधी
हमको चाहिये.....