Monday, August 6, 2012

अगर मैं कहूँ

अगर मैं कहूँ की प्यार है तुमसे
तो मानोगी नही
है ना....
पर जो सच है सो सच है
है ना....
कहो ना..

तुम आई कुछ बहार सी
सावन की पहली फुहार सी
प्यारी गुड़िया सी..
मेरी प्रिया सी...
शरमाती इठलाती....
मुस्कुराती...
मेरी सपनो की राजकुमारी सी

जीवन की बगिया मे
खिलती तुम
कुमुदनी के फूल सी
सांसो मे घुलती
धरती पर पड़ते
वर्षा के बूँदो से
उठती सौंधी सी
सुगंध सी

अगर मैं फिर कहूँ की
प्यार है तुमसे
तो मानोगी
 है ना....
क्योंकि जो सच है सो सच है
है ना....
कहो ना..

Thursday, August 2, 2012

मुझे नरक ही देना भगवान

मैं दुखी हूँ अपने देश के हालत पर

मैं जलता हूँ दिल मे दिल मे
देश के हालत देखकर..
और चीखते और गालियाँ देते हुए
दूसरो को
सोना चाहता हूँ चादर मे दुब्बकर

मैं रोता हूँ
उदास होता हू
हाथ पर हाथ धरकर
मैं दुखी हूँ अपने देश के  हालत पर

हर पल करना
चाहता हूँ आराम
और अच्छी नींद
चाहे पड़ोस मे हो
दंगे हत्याएँ
जघन्य अपराध
मुझे पिज़्ज़ा और पकोडे वाली भूख है
जबरन बंद करता हूँ कान
और आँख
मुझे सब माफ़ है
अपने आसपास होते हुए पाप
को करते हुए अनदेखा
मैं ओढ़ता हूँ मखमली चादर
खाते हुए चाय पराठे
सब मरे
मेरी बला से

वो 7 दिन से भूखा है
देश के लिए
मर जाए मेरे ठेंगे से
मैं हँसता हूँ सबके साथ उस पर
जान कर भी की कैसे छटपटाता हूँ
1 दिन उपवास रहकर

मैं महस्वार्थी
कायर
दूसरो की दुख पर
चुटकले गढ़नेवाला
मैं 2 दिनों वाला
पाखंडी देशभक्त हूँ
मक्कार हूँ
गुलाम हूँ
मैं नकारा इंसान हूँ

जलते हुए देश
और खुद के अंदर उबलते
लहू पर
रोज डालता हूँ हंसकर पानी
और आज से 100 साल बाद मर का जाना
चाहता हूँ स्वर्ग..

मुझे नरक ही देना भगवान



"हर तरफ फैला अंधेरा है..
जितना पाप सबका है..
उससे दुगना मेरा है.."