Sunday, July 31, 2011

बिटिया

बहुत दिनों बाद
भीगी थी ये आँखे
तेरे आने की खुशी में
तुझे देख कर
तू मेरी नन्ही परी

मेरा दिल गाता  था
जब तू किलकती
मुस्कुराती
मेरी आँखे भर जाती थी
जब अपने नन्हे हान्थो से
मेरी मूँछे नाक छूती
गाल सहलाती

जब घुटनो के बल
चलती,
मेरे पास आती
मेरी गोद में खेलती
सोती समाती
मुझे बातें करती
तुतलाती

तू लता सी
बढ़ती
फ्राक से
सलवार कमीज़ तक
पल में पहुचती

बदलते रिश्ते
तू बनती माँ मेरी

ना जाने कैसे
मेरे ज़ज्बात समझ जाती
ना जाने कैसे
मेरी  हर बात समझ जाती

मेरे हर पल का
हिसाब रखती
शायद अपनी एक आँख
मेरे पास रखती
हर गम दर्द मिट जाता
जब मेरे माथे पर हाथ धरती

मुझे थपकीयाँ देती
सांत्वना देती
राह सुझाती
जीना सिखाती
गाड़ी धीरे चलाने को कहती
वक़्त पर घर आने को कहती

माँ  तेरे जाने के बाद
सब कहते थे
इस जनम में
वापस लौट के ना आएगी तू
पर देख आख़िर तुझे मैने
पा लिया इसी जिंदगी मे दुबारा
मेरी बिटिया
मेरी माँ


6 comments:

  1. Ek Number Bhai..Zindgi ka Safr yeh kaisa safar hai koi samjha nahi koi jana nahi...Bhai Lu u r rock :)

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  3. m speechless...only one word to say............superb creation

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  4. baba ek aur dil chu lene wali rachna bhut accha.

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  5. Mera comment bhi note kar lo likh lo yaad kar lo :- Baba tum to nikharte ja rahe ho

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