मै चाहती हूँ
मुझसा बचपन
जिए मेरी बिटिया
वो झूले पेड़ो
की डाली पर
तोड़े निम्बोली अमरूद
और उसका एक
बेस्ट फ्रेंड हो
बड़ा सा कोई
एक पेड़
खेले वो कँहि दूर
घास के मैदान
मे
जब हम करते रहे
आराम घर पर
बेफिकर
उसे उसके हिस्से
की शाम मिले,
खेलने को छुपमछुपाई
और मिले एक
बहूत सारे दोस्त
जिनके साथ
बनाए रेत के मंदिर
चाहे गंदे हो जाए
पैर हाथ कपड़े
जब मै बनाती
रहूं खाना
वो ज़िद कर
बनवाए मुझसे
आलू की सब्जी
इंतजार करे
जब बने
हलवा सेवनइया
उसकी पसंदीदा
मिठाई..
मै निहारती
रहूँ उसे अपलक
जब वो खाए अपना पसंदीदा खाना..
वो चुपके से
चुराए
नमकीन बिस्किट
आचार
गुड शक्कर..
उसे उसके हिस्से
की
दशहरा दीवाली
होली मिले
मै चैन से सोती
रहूँ
उसी तरह जैसे
सोती थी मेरी
माँ
और
सोते थे मेरे पिता
तब भी
जब मै
होती थी कन्हि
दूर
किसी बगीचे..किसी
आँगन
अपने दोस्तो
संग
वो दौड़े उड़े
गिरे सम्हले
जिए वो बचपन
जैसा मैने जिया
और
उसे जीना चाहिए
Abhi k sabhi maa baap k man ki baat hai ye..bahut hi achi rachna
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