Sunday, April 7, 2024

अब वैसी शाम नही होती

अब शाम नही होती...या ऐसे कहें को वैसी शाम  नही होती जैसा की ८०-९० के दशक मे हुआ करती थी...पता  नही ये मेरा भ्रम है की सत्य  सुर्यदेव ता पटल से कुछ धीरे धीरे अस्त होते थे उस समय...और होती थी एक लंबी शाम बच्चो को देर तक खेलने को....मम्मियों और पड़ोस की आंटी की गपशप के लिए..

मुझे ये भी लगता है की तब की शामें कुछ शांत हुआ करती थी .. आप अपने घरौंदों को लौटे पक्षियों का कलरव  सुन सकते थे  ...मोटर गाड़ी की आवाज़ तो गाहे बगाहे ही आती थी....ये शाम ४:०० से ७:०० बजे तक की ही थी...पर काफ़ी लंबी लगा करती  पूरे दिन का सबसे अच्छा समय सबके लिए..

 हर शाम खूबसूरत होती...हमारे मोहल्ले में सब बच्चे मिले के खेला करते...छुपम छुपाई ,बुढ़िया छू और परी-पत्थर ,ऐसे बहूत सारे खेल और भी थे जैसे खो खो, जैसे आमदण्डा....कोई हारता कोई जीत जाता, कोई रूठ जाता तो कोई दाम देके थकने के बाद रोते रोते घर जाता ..सबका एक अलग मज़ा था

ये उस समय की बात है जब  केवल दूरदर्शन हुआ करता था...रंगोली चित्रहार और रंगो के रविवार का..तब आप  हर हफ्ते एक मूवी देखते थे एक लंबे ब्रेक के साथ ...

सारी शामें अलग .... और कभी कभी आती थी एक शाम ..जब पापा घर जल्दी आ जाते...एक शाम जिसका मुझे इंतज़ार होता ...

कभी मैं ..और साथ में कभी मेरा कोई दोस्त लकी रहा तो वो..हम जाते एक लॉन्ग वॉक पर..शहर के बाहर...छोटे मोटे कस्बों को पार करते हुए...
हम पहुंच जाते एक अलग देश...जान्हा दूर दूर तक घर  ना होता...केवल मैदान.. लंबे लंबे घास के मैदान...
और उनके बीच से बहती एक पानी की धारा....जो कन्हि नाले का ..कन्हि नदी का और कन्हि बड़े तालाब का रूप ले लेती....
कई बड़े बड़े चट्टानों के पीछे उछल कूद करती ये बेनामी पानी की धारा.. एकदम छुपी हुई थी....जो आपको तब दिखाई देती जब आप उसके बिल्कुल करीब  पहुंच जाते....हो सकता है मुझे ही उसका लोकल नाम ना पता हो...या उसका कोई नाम ही ना हो ....पर मैंने उसका नया नामकरण किया था  अपने दोस्तों के बीच..."गुप्त नाला" क्योंकि वो एक छिपी हुई धारा थी....

जब भी एक नई शाम मेरा कोई दोस्त हमें जॉइन करता ..मैं उसे उस नाले को दिखाने को काफी उत्सुक होता....किनारे बैठ कर पानी मे पैर डालना....छोटी छोटी मछलियां केकड़े...मेंढक और दूसरे किडो मकोडो को ताकना...एक अलग मज़ा था...

सूरज अपने अवसान की तैयारी कर रहा होता ..और हम दोस्त घास के मैदान मे दौड़ रहे होते....एक बड़े पत्थर पर खड़ा होकर  पानी को छोटे छोटे पत्थरों से टकराते और आगे बढ़ते देखना मुझे तब भी अच्छा लगता था और आज भी..

रास्ते मे पापा  कभी महाभारत की कहानियाँ  सुनाते ...तो कभी कोई पौराणिक कहानी..मुझे अर्जुन,कर्ण,अभिमन्यु  सबके सबके साकार दिखते..
चक्रव्यूह में घिरा वीर अभिमन्यु....अर्जुन के  गांडीव से निकलते तीर..कृष्ण के उंगली मे सुदर्शन....अंगुलिमाल ..अहिल्या....सब के सब साकार दिखते
एकदम ध्यान से कहानियों को सुनते ..उनसे कई सारे प्रश्न करते..उनके उत्तर समझते ..साथ मे शीतल ताजी हवा के झोंके से गले मिलते..हम चलते रहते..घर से निकल कर घर की ओर

जैसे  जैसे सूरज क्षितिज की और प्रस्थान करता हम भी अपने घर की और प्रस्थान करते.. आते आते रास्ते मे आता एक छोटी सी मिठाई की दुकान..जिसमे गिन चुन के आप को मिठाई दिखती....कढ़ाई में गाढ़े होते दूध ..और रंग बदल कर कलाकंद का रूप लेते हुए देखने से उसे
खाने का मज़ा दुगना हो जाता...ज्यादा नही १-२ पीस ही हमें मिला करता ..पर वैसा टेस्ट आज भी किसी मिठाई का नही...पता नही  कलाकंद   का वो टेस्ट कन्हि गुम सा हो गया है....रात ढलने से पहले हम घर पर आ जाते.....जान्हा  सिगड़ी पर बनी सब्जी दाल और गरमागरम माँ के हाथों फुल्के हमरा इंतजार करते......


हैं मेरे पास कुछ पैसे
कोई है जो
मेरे लिए
टाइम मशीन
बना दे
एक

मै फिर से
पापा के कंधों पर
चढ़ जाऊंगा
उंगली थामे
फिर वही
जगह
घूम आउन्गा
और लाऊंगा
 बहुत सी यादें
कहानी
और उस वक्त का टुकड़ा
जिसे
आज के लोग
ना देख पाएंगे
ना समझ पाएंगे

12 comments:

  1. Behtareen...bahut acchi rachna...

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  2. Waahh rahul bhai..Maja aa gaya.. love to read more of your talent please.. this english mein likh dijiye 😃😃

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  3. Bahut Sundar Bhaiya..... puraani yaadein yaad AA gyi

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  4. Sahaj sunder Sakar rachna

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  5. Bachman ko dubara jee liya

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  6. Yaade tazza ho gayi. Bachpan ka vo waqt yaad karna aur hasna bas. It was like meditation

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  7. Behtarin aur umda rahul bhaiya

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  8. Bhot hard Rahul sir!!

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  9. Nicely narrated.

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  10. Bhav purn lekhani!
    Mangal Aashish 🙌

    Bahumulya pal, Jo yado me bhi samriddhi ka ehsas karati hain!

    Tum sb bhagyshali ho, jise aise prempurn aur vidwan pita mile💕

    Adwitiya pita ko naman🙏
    Unhone har rishte ko samman aur Prem diya hai ❣️

    Prabhu ki sundar rachna ko naman🙇

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  11. Kya gajab likhe ho sir ji

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  12. Kya gajab likhe ho sir ji

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