Tuesday, November 2, 2010

प्रणाम

 मैथली शरण गुप्त जी पंक्तियो से अपने ब्लाग का पहला पोस्ट लिखता हूँ
"लोक रक्षा कए लिए अवतार था जिसने लिया,
निर्विवाद निरीह हो नर सरदिश कौतुक किया
राम नाम ललाम जिसका सर्वमंगल धाम है
प्रथम उस सर्वेश को श्रदधा सहित प्रणाम है"

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