Tuesday, April 12, 2011

कन्या भ्रूण हत्या

बहुत पहले किसी पेपर में पढ़ी कहानी के उपेर लिखी मेरी पहली पुरस्कृत कविता...
http://kavita.hindyugm.com/2007/09/blog-post_03.html


ठीक कुछ नौ माह की
अकेली  मैं
नव  मैं
इस धरा पर आने को तत्पर
पर है दुर्भाग्य
मेरे रिश्तेदारो
दादा-दादी
खुद पिता को
नापसंद
मेरा तयशुदा अंत.


कुविचार विमर्श और दिल
जल्लाद तैयार क्रूर दिल(डॉक्टर रेडी)
रोती माँ क्षमादान मांगती मेरा
बेबस लाचार
दिन मुक़र्रर
अरथी तैयार
मैं और माँ उस पर

चाकुओंऔजारो का मेला
हमारा कुछ पल का साथ अकेला
आती चिमती पैरो पर मेरे
सहमती जीवनदान मांगती
अकेली  मैं
चीत्कार
इस बार
भीषण दर्द
पैर उस पार
बिलखती  मैं गर्भ-गृह का अंधकार

पुनः जकड़
पकड़-पकड़
अंग-अंग
भंग-भंग
मेरे आँसुओं से भीगता माँ का पेट
खींचता मेरा शरीर
टूटता नाभि का जुड़ाव
माँ और मेरा
अंतिम छुवन
उसकी घुटन

अब अंत एक द्वार
धरा के पार
माँ को प्रणाम
पिता को प्रणाम
जिन्होने छः माह का जीवन दिया
माँ केवल आपकी
प्यारी बिटिया

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