2 ही रास्ते है हमारे सामने..
1962 सा जीवन
निरलज्ज होकर जीना
जैसे जीते है
नपुंसक कायर
डरपोक....
खोकर मानसरोवर और कई सौ
वर्गमील ज़मीन
देना होगा अरुणाचल कश्मीर
और रोना होगा
दूसरो के सामने
जैसे रोती है
बेशर्म औरते
जीना होगा..
दर्द से जो
दिए है
50 साल राज करने वाली सरकार ने
हमारे सिने पर
आधा कश्मीर खोकर
खिलाना होगा
पालना होगा
अफ़ज़ल और कसाब
जैसे हत्यारों कों
या फिर
हमे उगाने होंगे
पागल नृशंश वीर
और करनी होगी जी तोड़ मेहनत
चिंतनी होगी पुरुषत्व की खाद
हमे बदलनी होंगी कुछ
घटिया आदते
जैसे शांति पाठ
और करने होंगे कुछ पाप
चीखना होगा
दहाड़ना होगा
उठाने होंगे हथियरर्रर
दागने होंगे कई सौ गोले
बॉम्ब गोलियाँ
और करनी होगी
वीभत्स हत्याए
भूलना होगा विश्वाबंधुत्व
नाचना होगा लाशों के इर्दगिर्द
पीकर लहू
पचाना होगा
अगर जीना है शांति से
अहिंसा से
तो लेना ही होगा हिंसा का सहारा
क्योंकि यही धर्म है..
माँ की इज़्ज़त से बढ़कर कुछ नही
और
मातृभूमि माँ स्वर्ग से भी श्रेश्कर है
1962 सा जीवन
निरलज्ज होकर जीना
जैसे जीते है
नपुंसक कायर
डरपोक....
खोकर मानसरोवर और कई सौ
वर्गमील ज़मीन
देना होगा अरुणाचल कश्मीर
और रोना होगा
दूसरो के सामने
जैसे रोती है
बेशर्म औरते
जीना होगा..
दर्द से जो
दिए है
50 साल राज करने वाली सरकार ने
हमारे सिने पर
आधा कश्मीर खोकर
खिलाना होगा
पालना होगा
अफ़ज़ल और कसाब
जैसे हत्यारों कों
या फिर
हमे उगाने होंगे
पागल नृशंश वीर
और करनी होगी जी तोड़ मेहनत
चिंतनी होगी पुरुषत्व की खाद
हमे बदलनी होंगी कुछ
घटिया आदते
जैसे शांति पाठ
और करने होंगे कुछ पाप
चीखना होगा
दहाड़ना होगा
उठाने होंगे हथियरर्रर
दागने होंगे कई सौ गोले
बॉम्ब गोलियाँ
और करनी होगी
वीभत्स हत्याए
भूलना होगा विश्वाबंधुत्व
नाचना होगा लाशों के इर्दगिर्द
पीकर लहू
पचाना होगा
अगर जीना है शांति से
अहिंसा से
तो लेना ही होगा हिंसा का सहारा
क्योंकि यही धर्म है..
माँ की इज़्ज़त से बढ़कर कुछ नही
और
मातृभूमि माँ स्वर्ग से भी श्रेश्कर है
JAI SRI RAMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM
ReplyDeleteJIYOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOO