वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
छोटी सी निकर में
हम सब गलियों घुमा करते थे...
हम अपने दोस्तो से
जब कत्ति मीठी करते थे,
उनसे दुश्मन जैसे लड़ते थे.
.जिन के बिन हम 2 पल भी
नही रह सकते थे....
जब उँचे उँचे झाड़ो पर
हम झट से चढ़ जाया करते थे..
डर लगने पर..
मौत से क्या डरना
गाया करते थे...
जब हाथ में गन लेकर
हम हेलो अल्फ़ा बीटा करते थे..
और ना दिखने वाले दुश्मन को
तिस्कियाओं तिस्कियाओं कर
मारा करते थे....
वो चित्रहार के दिन थे..
वो मोगली सबको प्यारा था..
वो कंचे तारे जैसे थे
गोविंदा सारे जान्हा से न्यारा था...
जब नानी के यान्हा का
का हलवा बहुत ही खास था..
जब फलो का राजा जाम था..
और पीपल मे चुड़ाइलो का वास था
जब पापा के बाजार से आते ही
हमारे चेहरे खिल जाया करते थे
वो मुच्हर अंकल टॉफ़ी देते थे
जिनसे हम सबे जीयादा डरते थे.
वो स्कूलओ के दिन थे
वो भूतो के कहानी वाली राते थी.
दोस्तों की शामे थी..
और 100 झूठ वाली बाते थी..
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
जब बड़े भिया के साथ
हम मैच खेलने जाया करते थे..
20-20 के उस मैच वे बस
हमसे फीलडिंग करवाया करते थे..
Continue...............
जब हम छोटे बच्चे थे
छोटी सी निकर में
हम सब गलियों घुमा करते थे...
हम अपने दोस्तो से
जब कत्ति मीठी करते थे,
उनसे दुश्मन जैसे लड़ते थे.
.जिन के बिन हम 2 पल भी
नही रह सकते थे....
जब उँचे उँचे झाड़ो पर
हम झट से चढ़ जाया करते थे..
डर लगने पर..
मौत से क्या डरना
गाया करते थे...
जब हाथ में गन लेकर
हम हेलो अल्फ़ा बीटा करते थे..
और ना दिखने वाले दुश्मन को
तिस्कियाओं तिस्कियाओं कर
मारा करते थे....
वो चित्रहार के दिन थे..
वो मोगली सबको प्यारा था..
वो कंचे तारे जैसे थे
गोविंदा सारे जान्हा से न्यारा था...
जब नानी के यान्हा का
का हलवा बहुत ही खास था..
जब फलो का राजा जाम था..
और पीपल मे चुड़ाइलो का वास था
जब पापा के बाजार से आते ही
हमारे चेहरे खिल जाया करते थे
वो मुच्हर अंकल टॉफ़ी देते थे
जिनसे हम सबे जीयादा डरते थे.
वो स्कूलओ के दिन थे
वो भूतो के कहानी वाली राते थी.
दोस्तों की शामे थी..
और 100 झूठ वाली बाते थी..
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
जब बड़े भिया के साथ
हम मैच खेलने जाया करते थे..
20-20 के उस मैच वे बस
हमसे फीलडिंग करवाया करते थे..
Continue...............
Tu Hero ho gaya hai bhai
ReplyDeleteWowwww....bachpan k din yaad dila diye yaar..
ReplyDeleteVo Mogali, Vo Shaktimaan..
Vo katti, buchii.
Its simply wowwwwwwwwwwwwww...
Keep it up Rahul...Greate Job..
kya kavita hai pathakji, maja aa gaya, waiting for next part..
ReplyDeletegreat work sir...simply awesome...
ReplyDeleteDhiru bhai : thanks...
ReplyDeleteJat saab: vo katti vo buchhi..thanks for appretiation
Amit : thnkas bhai....wait karo dalnege jald i
Trapti: ...thaks a looooooot...:)