Wednesday, July 27, 2011

वो दिन भी कितने अच्छे थे

वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
छोटी सी निकर में
हम सब गलियों घुमा करते थे...

हम अपने दोस्तो से
जब कत्ति मीठी करते थे,
उनसे दुश्मन जैसे लड़ते थे.
.जिन के बिन हम 2 पल भी
नही रह सकते थे....

जब उँचे उँचे झाड़ो पर
हम झट से चढ़ जाया करते थे..
डर लगने पर..
मौत से क्या डरना
गाया करते थे...

जब हाथ में गन लेकर
हम हेलो अल्फ़ा बीटा करते थे..
और ना दिखने वाले दुश्मन को
तिस्कियाओं तिस्कियाओं कर
मारा करते थे....

वो चित्रहार के दिन थे..
वो मोगली सबको प्यारा था..
वो कंचे तारे जैसे थे
गोविंदा सारे जान्हा से न्यारा था...

जब नानी के यान्हा का
का हलवा बहुत ही खास था..
जब फलो का राजा जाम था..
और पीपल मे चुड़ाइलो का वास था

जब पापा के बाजार से आते ही
हमारे चेहरे खिल जाया करते थे
वो मुच्हर अंकल टॉफ़ी देते थे
जिनसे हम सबे जीयादा डरते थे.

वो स्कूलओ के दिन थे
वो भूतो के कहानी वाली राते थी.
दोस्तों की शामे थी..
और 100 झूठ वाली बाते थी..

वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम छोटे बच्चे थे
जब बड़े भिया के साथ
हम मैच खेलने जाया करते थे..
20-20 के उस मैच  वे बस
हमसे फीलडिंग करवाया करते थे..

Continue...............

5 comments:

  1. Wowwww....bachpan k din yaad dila diye yaar..
    Vo Mogali, Vo Shaktimaan..
    Vo katti, buchii.
    Its simply wowwwwwwwwwwwwww...
    Keep it up Rahul...Greate Job..

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  2. kya kavita hai pathakji, maja aa gaya, waiting for next part..

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  3. great work sir...simply awesome...

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  4. Dhiru bhai : thanks...

    Jat saab: vo katti vo buchhi..thanks for appretiation

    Amit : thnkas bhai....wait karo dalnege jald i

    Trapti: ...thaks a looooooot...:)

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