Tuesday, June 6, 2023

मिलता नहीं है

एक वीभत्स रेल दुर्घटना ...एक करुणड दृश्य के बाद की कविता...

 

 मिलता नहीं है 

मेरा लड़का!!
वो मिलता ही नहीं!!

और एक नाउम्मीद
बूढ़ा बाप
ढूँढ रहा है 
अपने युवा बेटे का
शव 
की कर सके 
विधिवत क्रियाकर्म
 और कर दे
मुक्ति अपने 
बेटे की
अपनी खुशिओ की
अपने लाठी की
सहारे की

कई सौ मुर्दों से
पटी  हुई है ज़मीन
और 
सबकी ही अपनी 
 करुन कहानी 
इतनी
की सुख जाए 
आँसुओ के समंदर

पूछा किसी ने 
क्या हुआ बाबा
 वो बुदबुदाता रहा 
खोजते हुए 
बस शव
"वो मिलता ही नही"
"वो मिलता ही नही"

एक ऐसी गुहार
बेबसी
 की  देख
आँसुओ की धारा 
बन निकल पड़ी
एक दुखो के एक लावा सी
आँखो से,हृदय से

वेदना तिव्र ऐसी की
मैं रोना चाहता हूँ
चीखकर
कसकर
उस पिता से गले लगकर
 शायद 
 दोनो ही 
सीने मे
 महसूस हो कुछ शांति 
दो पलों की ही सही


 

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