पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते
क्योंकि हम तुम जितने कभी महान नही हो सकते..
तुम सहती हो मासिक
नौ महीने
तक का
मानसिक शारीरिक
परिवर्तन
फिर
असहनीय पीड़ा से ग़ुजरकर
तुम देती हो नवजीवन
त्याग कर
निंद्रा भूख मनोरंजन
करती हो शिशुपालन
और पाते हुए देवित्व
तुम बन जाती हो माँ
तुम बेटी हो तो भी माँ हो
तुम बहन हो तो भी माँ हो
तुम सखी हो तो भी माँ हो
इसीलिए
पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते
क्योंकि हम कभी माँ नही हो सकते.
क्योंकि हम तुम जितने कभी महान नही हो सकते..
तुम सहती हो मासिक
नौ महीने
तक का
मानसिक शारीरिक
परिवर्तन
फिर
असहनीय पीड़ा से ग़ुजरकर
तुम देती हो नवजीवन
त्याग कर
निंद्रा भूख मनोरंजन
करती हो शिशुपालन
और पाते हुए देवित्व
तुम बन जाती हो माँ
तुम बेटी हो तो भी माँ हो
तुम बहन हो तो भी माँ हो
तुम सखी हो तो भी माँ हो
इसीलिए
पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते
क्योंकि हम कभी माँ नही हो सकते.
Brilliant! You should seriously write more.
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