Saturday, June 15, 2019

एक अधपकी ..कच्ची कविता..

मैं कोशिश करता हूँ
सबसे पहले याद की..
आपकी
तो याद आती है
वो तस्वीर का दिन
जो हमने ली थी किसी
गार्डेन में
जब चुभ रही थी मुझे घास
और आपने बिछा के अपना रुमाल
बिठाया था मुझे

फिर मेरे जनमदिन पर
वो लंबी सी टॉय राइफ़ल..
पहले दिन ही महँगे से बैट
के टूट जाने पर
आपने नही डांटा

वो डाँट कर भी आपका लाना कॉमिक्स
वो हर शाम की ५ किमी लंबी
इवनिंग वॉक
और उस शाम की ढेरो कहानियाँ
फिर रास्ते मे पड़ने वाले एक छोटे से
होटेल की वो टेस्टी सी कलाकंद

मेरी हर एक ज़िद और सपने
पूरे करने के लिए
किया अथक परिश्रम
आपके पसीने की सुगंध
आपके चौड़े से हथेली का
स्पर्श
और गोद में बैठने
पर वो राजकुमार वाली फीलिंग



पापा सूपरमेन होते है
मेरे भी हैं
और मैं भी बनूंगा
अपनी बिटिया
का



2 comments:

  1. बात तो बिल्कुल सही है पापा तो सुपरमैन ही होते हैं।उनके रहते किसी तकलीफ़ का पता नहीं चलता। बोहोत अच्छी कविता है।

    ReplyDelete
  2. You are a Superman Rahul bhai and I'm sure you'll be a Superdad as well. Very beautifully written.

    ReplyDelete