Thursday, December 13, 2018

मै चाहती हूँ


मै चाहती हूँ
मुझसा बचपन
जिए मेरी बिटिया
वो झूले पेड़ो की डाली पर
तोड़े  निम्बोली अमरूद
और उसका एक बेस्ट फ्रेंड हो
बड़ा सा कोई एक पेड़

खेले वो  कँहि दूर
घास के मैदान मे
 जब हम करते रहे
आराम घर पर
बेफिकर

उसे उसके हिस्से की शाम मिले,
खेलने को छुपमछुपाई
और मिले एक बहूत सारे दोस्त
जिनके साथ
 बनाए रेत के मंदिर
चाहे गंदे  हो जाए
पैर  हाथ कपड़े

जब मै बनाती रहूं खाना
वो ज़िद कर बनवाए मुझसे
आलू की सब्जी
इंतजार करे जब बने
हलवा  सेवनइया
उसकी पसंदीदा
मिठाई..

मै निहारती रहूँ  उसे अपलक
जब वो खाए  अपना पसंदीदा खाना..

वो चुपके से चुराए
नमकीन बिस्किट आचार
गुड शक्कर..
उसे उसके हिस्से की
दशहरा  दीवाली  होली मिले


मै चैन से सोती रहूँ
उसी तरह जैसे
सोती थी मेरी माँ
और
सोते थे मेरे  पिता
तब भी
जब मै
होती थी कन्हि दूर
किसी बगीचे..किसी आँगन
अपने दोस्तो संग

वो दौड़े उड़े गिरे सम्हले
जिए वो बचपन
जैसा मैने जिया और
उसे जीना चाहिए

Tuesday, July 29, 2014

पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते

पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते
क्योंकि हम तुम जितने कभी महान नही हो सकते..

तुम सहती हो मासिक
नौ महीने
तक का
मानसिक शारीरिक
परिवर्तन
फिर
असहनीय पीड़ा से ग़ुजरकर
तुम देती हो नवजीवन
त्याग कर
निंद्रा भूख मनोरंजन
करती हो शिशुपालन
और पाते हुए देवित्व
तुम बन जाती हो माँ


तुम बेटी हो तो भी माँ हो
तुम बहन हो तो भी माँ हो
तुम सखी हो तो भी माँ हो
इसीलिए
पुरुष और स्त्री कभी समान नही हो सकते
क्योंकि हम कभी माँ नही हो सकते.

Wednesday, January 30, 2013

मैं राम हूँ...

मैं राम हूँ
रघुकुल लाल
दसरथ नंदन
सीतापति राम

मैं हैरान हूँ
कुछ अल्प ज्ञानी
अर्धविक्सित
कलयुगी
स्वघोषित
बुद्धिजीवियों के
बयान से

प्रचार पाने की
लोलुप्ता
या फिर
ओछी मानसिकता
जिन्होने रावण
 के चरित्र को
आदर्श भाई के
दर्जा देकर
कैसी कटुउक्ति है की
रावण ने
बहन के अपमान पर
राजवंश लूटा दिया
और स्त्री के हरण के
बाद भी स्पर्श नही किया
वह रावण महान था

तो सुनो
वह कोई वीर भाई नही था
वह तो नपुंसक कायर था
जिसने अपनी
काम्दग्धा
कलंकनी भगिनी सुर्पणखा
के नाक काटने पर भी
प्राणघातक हमले का
दुस्साहस ना जुटा सका
इस राम पर
और
छल से
हर लिया
मेरी प्राणप्रिया
चोरो की भाँति

जानता था रघुकुल
भुजबल
पराक्रम
खर दुसन सहित
1400 राक्षाषो का
पल में
वध करने वाले
राम और सौमित्र
के पराक्रम का आभाष
था राक्षशराज को
तभी तो छिपा कर ले गया
सीते को
पर स्पर्श का साहस ना कर सका था
यह सोँचकर भी
की राम के महाकूपित
होने का परिणाम क्या होगा
समूची लंका
और संपूर्ण राक्षस
जाति का रक्तिम विनाश

जारी.......


Wednesday, January 16, 2013

कोई अच्छा म्यूज़िक चैनल लगा

क्या कहा
पाकिस्तानी सैनिकों ने
धड़ से अलग कर दिया
किसी एक भारतीय सैनिक
का सर..
वीभत्सता से .
बहूत बुरा हुआ
यार एक कम कर
ये न्यूज़ चैनल बंद कर
कोई अच्छा म्यूज़िक चैनल लगा

क्या फिर
आतंकवादी हमला हुआ
श्रीनगर मे
5 सैनिक शाहिद हुए
यार एक कम कर ना
ये न्यूज़ चैनल बंद कर
कोई अच्छा म्यूज़िक चैनल लगा

लिखता हूँ
और मिटाता हूँ
कुछ इस तरह की पंक्तिया
"उठाओ हथियार
करो प्रहार
वीरो,देशभक्तो
...............
और जाने क्या क्या"

और जब पढ़ता हूँ
खुद इन पंक्तियों को
तो कोई अट्टहास करता है
बड़े जोरो से..
 मेरे अंदर

जब इतना उबाल हो के भी
उफन के बाहर आने का साहस
नही पतीले से
तो किसी और से
उम्मीद..
कायरता है

क्या कहा
एक बार फिर
देश की सरकार ने
कड़े शब्दो मे निंदा की है
पाकिस्तानी करतूतो की..
इनकी @$@#@ @$@# @#$@#
भाई एक कम कर
ये न्यूज़ चैनल बंद कर
कोई अच्छा म्यूज़िक चैनल लगा

Thursday, November 29, 2012

पत्नी

बिनू बात दृग वर्षा करे
काँपत है हिय मोय
जियरा धक धक धूप धूप करे
देख सजन को रोय,
देख सजन  को रोय
पाठक मन घबराए
किए लाख जतन
की पत्निजी दे मुस्काय

काफ़ी करके जोड़ तोड़
और करके गहन अनुसंधान
कुछ सुत्र हम पा गये.
नित कीजिए प्रयोग श्रीमान

तारीफ साले की कीजिए
और ससुर को कहिए महान
सासू को अम्मा कहिए
ससुराल सा नही जहान
इतने पर जो ना हुआ काम
तो लीजिए ये ब्रम्‍ह ज्ञान
"पत्नी सहेली निंदा
और पड़ोसन बुराई
है रामबन"

अंत में २ दोहे .....

रहत रहत पत्नी संग,होशियार होय मूर्खवान
चौबीस घंटा सर सवार,बदन पर करत निशान

( नोट :बदन पर बेलन,चिमटे का निशान)

जो पति उत्तम परकृति,का करी सकट कुसंग,
तिल तिल कर के है जिए,बिनू मित्र बिनू रम

Friday, September 7, 2012

मैं फिर से जिंदा होना चाहता हूँ


माँ तेरी याद बहुत सताती है..

इस दूर बड़े
महानगर के सन्नाटो में
जब डर सा कभी मैं जाता हूँ..
अंजाने अजनबी शहर के
रुखेपन से घबरा जाता हूँ
जब बिन मतलब के
यूँ ही रोने का जी करता है..
जब थॅकी हुई किसी शाम
को सोने का जी करता है..
जब किसी झपकी के झोके
संग बचपन की यादे आती हैं
सच कहता माँ मैं
तेरी याद बहुत सताती है..


अनमने उलझे मन से
भूखे पेट जब सोता हूँ
तो लगता है तू उठ के
खाने को मनुहार करे..
लल्ला राजा बेटा कहकर
माँ तू मुझे प्यार करे..

काली काली रातो के
काले सपनो से
जब भी डर सा जाता हूँ..
रोने वाली चोट पर
जब आँसू नही बहा पता हूँ.
जब सर्दी वाली रातों में
घंटो नींद नही आ पाती है
सच कहता हूँ माँ
तेरी गोदी की गर्माहट वाली
नींद लोरी थपकीयाँ
बहुत याद आती है..

माँ मैं लौट के वापस आना चाहता हूँ
तेरे साए में जीना चाहता हूँ
मैं छोटा होना चाहता हूँ
ज़िद करके रोना चाहता हूँ
मैं रेत मे खेलना चाहता हूँ
मैं गंदा होना चाहता हूँ
माँ  मैं फिर से जिंदा होना चाहता हूँ

Monday, August 6, 2012

अगर मैं कहूँ

अगर मैं कहूँ की प्यार है तुमसे
तो मानोगी नही
है ना....
पर जो सच है सो सच है
है ना....
कहो ना..

तुम आई कुछ बहार सी
सावन की पहली फुहार सी
प्यारी गुड़िया सी..
मेरी प्रिया सी...
शरमाती इठलाती....
मुस्कुराती...
मेरी सपनो की राजकुमारी सी

जीवन की बगिया मे
खिलती तुम
कुमुदनी के फूल सी
सांसो मे घुलती
धरती पर पड़ते
वर्षा के बूँदो से
उठती सौंधी सी
सुगंध सी

अगर मैं फिर कहूँ की
प्यार है तुमसे
तो मानोगी
 है ना....
क्योंकि जो सच है सो सच है
है ना....
कहो ना..